मेरा 2 साल का बच्चा क्यों नहीं सो रहा है?HealthPlanet

Posted on Wed 1st Mar 2023 : 10:58

अगर बच्चा रात में समय से सोता नहीं तो इन तरीकों से उसे सुलाएं

शांत हो सोने का कमरा

बच्चे को जहां सुलाना है वहां का माहौल बहुत सुकून भरा और शांत होना चाहिए। अगर आप बच्चे को शोर-शराबे के बीच सुलाने की कोशिश करेंगे तो उसका दिमाग कभी शांत नहीं होगा और उसे नींद नहीं आएगी। कोशिश करिए कि जहां बच्चे को सुलाना हो, वहां बहुत हल्की रौशनी हो। इससे बच्चे के शरीर में मेलाटोनिन हॉर्मोन बनेगा और बच्चे को बेहतर और जल्दी सोने में मदद करेगा।

बच्चे को कमरे में लाकर हल्की थपकियां दें। लाइट को धीरे-धीरे डिम करें। धीरे-धीरे बच्चे की आदत बन जाएगी कि जैसे ही लाइट डिम होने लगे, उसे नींद आने लगेगी।
सोने का समय तय करें

हर बच्चे का सोने और जागने का समय अलग होता है। इसीलिए जरूरी है कि आप अपने बच्चे की स्लीप साइकिल और पैटर्न पहचानें। आपका बच्चा दोपहर में सोना पसंद करता है या शाम होते ही उसे नींद आती है। अमूमन एक 6 महीने का बच्चा सोकर उठने के 2 से 2.।5 घंटे बाद फिर सोना चाहता है। लेकिन 1 साल का बच्चा 3.15 घंटे जग लेता है।

ऐसे में अगर आप अपने बच्चे के सोने के पैटर्न को समझेंगे तो उसे कब सुलाना है, ये आप तय कर पाएंगे। दिन भर अगर बच्चा सही समय पर थोड़ी-थोड़ी नींद लेता है तो रात में उसे सोने में तकलीफ कम होगी।

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दूध और ठोस आहार (सॉलिड फूड) का बैलेंस

अगर बच्चे को भूख लगी है या उसका पेट ठीक से नहीं भरा है तो उसे नींद नहीं आएगी। इसीलिए जरूरी है कि आप दनभर में उसे दूध और ठोस आहार का बैलेंस्ड खाना खिलाएं।

अगर बच्चे की नींद भूखे पेट ही लग गई है तो उसे उठाकर दूध पिलाएं। इस तरह से वो आधी रात में भूख की वजह से नहीं जागेंगा और पूरी नींद लेगा।

6 महीने से बड़े बच्चों को ठोस आहार जरूर खिलाएं। दिनभर में उन्हें 3 बार ठोस आहार जरूर खिलाएं। 10 महीने के बाद उनके भोजन में प्रोटीन जरूर शामिल करें। कोशिश करें कि उन्हें बहुत अधिक भी ना खिलाएं जिससे नींद में उनका पेट दर्द हो और उनकी नींद खुल जाए।
सोने का रूटीन बनाएं

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बेहतर नींद के लिए सोने का रूटीन जितना बड़ों के लिए जरूरी है, उससे कहीं ज्यादा बच्चों के लिए जरूरी है। आपने भी देखा होगा कि शाम होते ही बच्चे बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं। इसीलिए नींद का समय होने पर भी उनकी एनर्जी हाई होती है और नींद नहीं आती।

इसीलिए शाम होते ही बच्चे को सुलाने का एक रूटीन बनाएं। जरूरत पड़े तो शाम के 5 बजे बच्चे को गुनगुने पानी से नहलाएं। इसके बाद लिविंग रूम में जहां रौशनी हो, बच्चे को दूध पिलाएं। फिर उन्हें उनके कमरे में ले जाएं और धीरे-धीरे लाइट डिम करें।

सोने से पहले टीवी बंद करें, मोबाइल फोन को खुद से और उनसे दूर ही रखें। इस तरह रोज एक ही समय पर रूटीन में काम करने से उनका शरीर और दिमाग भी अच्छी नींद के लिए तैयार हो जाएगा।
झपकी लेना भी है जरूरी

साल भर तक के बच्चे दिन में कई बार सोते और जागते हैं। झपकी लेना भी बच्चों के विकास के लिए बहुत जरूरी है। लेकिन कोशिश करें कि सोने के समय के आस-पास बच्चा झपकी ना ले, वरना रात में उसे नींद नहीं आएगी।

दिनभर की झपकियों और रात की नींद के बीच आपको बैलेंस बनाना जरूरी है। अगर बच्चा सुबह 10 बजे फिर से सोए तो उसे 12 बजे उठा दीजिए। दोपहर का खाना खिलाकर उसे फिर सुलाइए लेकिन शाम से पहले ही उठाइए।

इस तरह बच्चे को रात की नींद भी अच्छी आएगी और दिन में अच्छे से सोने की वजह से चिड़चिड़ाहट भी नहीं होगी। बच्चे के स्वास्थ्य के साथ अपनी नींद का ख्याल भी रखिए और जब भी मौका मिले, आप भी झपकी मार ही लीजिए।

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